उपलब्धियाँ

1. भौतिक निष्पादन 2017-18 पर उपलब्धि

  • i. वर्ष 2017-18 के दौरान तांबे की कुल बिक्री पिछले सात वर्षों में सर्वश्रेष्ठ रही है।
  • ii. कॉपर कैथोड के उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 39% का आधिक्य रहा है।
  • iii. कॉपर वायर रॉड का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 22% अधिक रहा है।
  • iv. सांद्र धातु का उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 4% अधिक हुआ है।
  • v. खेत़ड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स से कुल वार्षिक ताम्र अयस्क एवं सांद्र धातु का उत्पादन वर्ष 1998-99 के बाद सर्वाधिक रहा है।
  • vi. झारखण्ड में केंदाडीह खानों को दिसम्बर, 2017 में पुन: खोला गया तथा खेत़ड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स, राजस्थान की बनवास खान (नई) को जून, 2017 में प्रारम्भ किया गया।

  • 2. पुरस्कार एवं सम्मान

  • i. एचसीएल को ताज बंगाल कोलकाता में 8.11.2017 को वर्ल्ड एचआरडी कांग्रेस द्वारा पुरस्कार समारोह के दौरान कोलकाता के सर्वश्रेष्ठ नियोक्ता ब्राण्ड का पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
  • ii. एचसीएल को वर्ल्ड सीएसआर डे द्वारा विवांता बाई ताज, यशवंतपुर, बैंगलोर में 20.9.2017 को राष्ट्रीय सीएसआर नेतृत्व पुरस्कार दिया गया।
  • iii. आईसीसी की क्वालिटी सर्कल टीमों, ‘दिनकर’ एवं ‘सहयोग’ ने चैप्टर कॉन्वेंशन ऑन क्वालिटी कॉन्सेप्ट्स (सीसीक्यूसी) के दौरान, ताज बंगाल कोलकाता में 12.9.2017 को स्वर्ण श्रेणी में जीत हासिल की। इनको, मैसूर में 1.12.2017 से 4.12.2017 तक आयोजित नेशनल कॉन्वेंशन ऑन क्वालिटी कॉन्सेप्ट्स (एनसीक्यूसी) के दौरान क्रमश: ‘उत्कृष्टता’ एवं ‘अति- उत्कृष्टता’ की श्रेणियों में रखा गया।
  • iv. श्री अनुपम आनंद, निदेशक (कार्मिक) को विवांता बाई ताज, यशवंतपुर, बैंगलोर में 19.9.2017 को आयोजित टाइम्स ऐसेंट्स प्रेज़ेंट्स - एशिया पैसिफिक एचआरएम कांग्रेस एण्ड अवार्ड्स – 16वाँ आयोजन के दौरान भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों में मानव संसाधन के सर्वश्रेष्ठ नेताओं में से एक चिह्नित किया गया। वर्ल्ड एचआरडी कांग्रेस की जूरी तथा बोर्ड के सदस्यों ने 16.2.2018 को ताज लैण्ड्स एंड, मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में एचआर सुपर अचीवर्स - पीएसयू का सम्मान श्री अनुपम आनंद को प्रदान किया।

  • 3. ऊर्जा संरक्षण -

  • i. किए गए उपाय या ऊर्जा संरक्षण पर प्रभाव :
    • पावर फैक्टर सुधरा तथा युनिटी स्तर के आसपास बना रहा।
    • परम्परागत उच्च वाटेज वाले प्रकाश बल्बो की जगह पर कम वॉटेज वाले एलआईडी प्रकाश बल्बों को लगाने से आशानुसार वार्षिक ऊर्जा में रु. 48 लाख से अधिक की बचत हुई।
    • एमसीपी में 14 सं. 22.5 किलोवॉट मोटरों के बदले में 18 किलोवॉट की ईईएफ मोटरें लगाई गईं।
    • आईसीसी के फ्लैश स्मेल्टर तथा रिफाइनरी में कई चरणों में प्रीमियम श्रेणी की आई-3 ऊर्जा निपुण मोटरों को 30 से 40 वर्ष पुरानी परम्परागत मोटरों के स्थान पर स्थापित किया गया।
    • केसीसी में क्रशरों, रॉड मिलों, बॉल मिलों आदि में इन मशीनों की निष्क्रियता को घटाने हेतु, नजदीकी निगरानी रखने के लिए अलग-अलग ऊर्जा मीटर लगाए गए हैं।
    • केसीसी में, सभी क्रशरों की सेटिंग को घटा कर तथा स्क्रीन पैनलों के 50% के बदले में 30 मेश आकार के पैनल लगा कर, रॉड मिलों का इनपुट आकार सुधारा गया है। इसके परिणामस्वरूप निपुणता में वृद्धि हुई है तथा ऊर्जा खपत में 0.8 किलोवॉट/ टन मिलिंग की कमी आई है।
    • आईसीसी में, ऑयल फायर्ड पैकेज बर्नर बॉयलर तथा डीजी सेट लगाए गए हैं, जो कि कोयला आधारित निजी ऊर्जा संयंत्र के विकल्प हैं। बॉयलर एवं डीजी सेट के अलावा, फ्लैश स्मेल्टर के कार्य के लिए स्टीम चालित ब्लोवरों के स्थान पर इलेक्ट्रिक चालित ब्लोवर तथा कन्वर्टर टिल्टिंग मेकैनिज़्म का आधुनीकरण इलेक्ट्रो-न्युमैटिक सिस्टम (डुअल ड्राइव सिस्टम) द्वारा किया गया है।
  • ii. कम्पनी द्वारा ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोतों का उपयोग करने हेतु किए गए उपाय :
    • मलांजखण्ड कॉपर प्रोजेक्ट में उपस्थित 35.25 किलोवॉट रूफ टॉप सौर ऊर्जा संयंत्र में 5.75 किलोवॉट सौर ऊर्जा जोड़ी गई है।
    • सभी इकाइयों तथा निगमित कार्यालय में रूफ टॉप सौर ऊर्जा के प्रयोग की तर्कसंगतता के अध्ययन का दायित्व मेसर्स आरईआईएल को सौंपा गया है।
  • iii. ऊर्जा संरक्षण उपकरणों पर किया गया पूंजीगत व्यय : रु. 26 करोड़

  • 4. प्रोद्योगिकी (तकनीकी) को अपनाना -

  • i. तकनीकी को अपनाने हेतु किए गए उपाय :
    • आईसीसी में पुराने कोल फायर्ड बॉयलर के स्थान पर निपुण फरनेस ऑयल फायर्ड पैकेज बॉलर को लगाया गया है।
    • आईसीसी के फ्लैश स्मेल्टर के कार्य हेतु, पुराने स्टीम चालित ब्लोवरों की जगह पर आधुनिक इलेक्ट्रिक चालित ब्लोवर लगाए गए हैं।
    • आईसीसी में कन्वर्टर टिल्टिंग मेकैनिज़्म का आधुनीकरण इलेक्ट्रो-न्युमैटिक सिस्टम (डुअल ड्राइव सिस्टम) द्वारा किया गया है।
    • टीसीपी में, उत्पादों की पैकेजिंग सुधारने के लिए कन्वेयर सिस्टम सहित नए कॉइलर लगाए जा रहे हैं।
    • एमसीपी में, माल के छिटक कर बाहर बह निकलने को रोकने हेतु, सोडियम सिलिकेट के साथ अधिक साफ फ्लोटेशन सर्किट में संशोधन-कार्य ताकि अंतिम सांद्र (उत्पाद) की गुणवत्ता बेहतर की जा सके।
  • ii. उत्पाद बेहतरी, लागत घटना, उत्पाद विकसित करना अथवा आयात का विकल्प जैसे प्राप्त लाभ :
    • तकनीकी को अपनाने हेतु प्रयासों द्वारा ऊर्जा खपत में कमी, उन्नत पर्यावरणीय संरक्षण तथा प्रचालनों की सुनिश्चित सुरक्षा जैसे परिणाम प्राप्त हुए हैं।
  • iii. आयातित तकनीकी के मामले में (वित्त वर्ष के प्रारम्भ से आंकलित पिछले तीन वर्षों के दौरान) :
    (क) आयातित तकनीकी का वर्णन -
    1. आईसीसी में प्रचालनों में परिवर्तन हेतु चीन से आयातित आधुनिक इलेक्ट्रिक चालित ब्लोवर तकनीकी।
    2. कैनाडा से आयातित ईएमईडबल्यू तकनीकी - इस तकनीकी द्वारा प्रयोग हो चुके इलेक्ट्रोलाइट के कम घनत्व में से भी एचसीएल द्वारा एलएमई-ए ग्रेड का कैथोड प्राप्त किया जा सकता है, जो कि परम्परागत विधि से सम्भव नहीं है। इसके अलावा, यह तकनीकी आईसीसी की रिफाइनरी के प्रयोग हो चुके इलेक्ट्रोलाइट में से निकेल की रिकवरी करने के काम भी आ सकता है।
    3. कैनाडा से एक और तकनीकी – एसिड प्युरीफिकेशन यूनिट (एपीयू) का आयात किया गया। इस तकनीकी द्वारा एचसीएल की आईसीसी इकाई के रिफाइनरी के प्रयोग हो चुके इलेक्ट्रोलाइट में से अधिकतर एसिड (अम्लीय) अंश को अलग करके रीसाइकल किया जा सकेगा। यह पर्यावरणीय-अनुकूल तकनीकी अपशिष्ट में से तरल अंश को कम करेगी तथा आगे के क्रम में निकेल की रिकवरी करने में सहायक होगी।